किसी भी महीने के शुक्ल भाग  के प्रथमा तिथि से प्रारम्भ कर पूर्णिमा तक  शमशान या सुनसान स्थान में काली की  में प्रतिमा  के आगे  सिन्दूर एवं  अपनी अनामुका ऊँगली के खून से भैरवी चक्र बनाकर उसके आगे सरसों के तेल का दीपक दीपक जलाए | और काली की पूजा के पश्चात आक की लकड़ी की आग में गुढ्हल के फूल , सिन्दूर , जौ ,तिल , लहसून , मुर्गे का पंख आदि सामग्री से १०८ बार मंत्रो से हवन करे | अमावस्या को काली माँ का पूजन करे और उनको प्रणाम करे |

इस सिद्धि के बाद घोड़े की ताज़ा लीद का रस अपने पांच बूँद मूत्र के साथ जिस भी स्त्री के कानो में टपका देंगे वह सदा के लिए आप की दासी हो जायेगी | यदि स्त्री के मस्तक  में दर्द हो रहा हो  तब भी आप बहाने से ऐसे मौके का फायदा उठा सकते है l

काकजंघा , दुर्वा , भौरे का पंख कमल , तगर की जड़ का चूर्ण बनाकर मंत्र का इक्कीस बार जाप करके जिस भी स्त्री या पुरुष के ऊपर डाल दिया जाय वह साधक के वश में हो जाता है

मंत्र :

काक जंगा सिता प्कछो भ्रामरोकृष्ट मुत्पलम |

मुलं ताग्रजम चैशाम चुर्न्चिपतम विमोह येत |

हवा में उड़ रहा कोई भी पत्ता , फूल कामल , भवरे का पंख इन सबका चूर्ण बना कर मंत्र का इक्कीस बार जाप कर जिस भी स्त्री या पुरुष के ऊपर डाल देंगे वह वश में हो जाएगा |

प्यार को पाने के टोटके:-

महीने के किसी भी रविवार को कांसे की थाली में भोजपत्र को बिछा कर उस पर असली सिन्दूर से निचे दिए गए मंत्र  को लिखे | फिर उसके सामने ग्यारह तेल के दीपक प्रज्ज्वलित कर ले तथा सिद्ध पारद शिव लिंग को उसके ऊपर स्थापित कर दे | और उक्त मंत्र को ग्यारह हजार बार जाप करे | यह प्रयोग लगातार ग्यारह दिनों तक करते रहे | जब ग्यारह हजार मंत्र पूरा हो जाय तब यह मंत्र सिद्ध हो जाता है | अब इस मंत्र में वशीकरण की शक्ति आ जाती है | इसके बाद साधक जिस किसी को भी देखकर उसके सामने मन ही  मन वह तीन बार उक्त मन्त्रो का जाप  करेगा | वह स्त्री  या पुरुष साधक के वश में जाएगा |

सामग्री :

  • कांसे की थाली
  • ग्यारह दीपक
  • सिन्दूर
  • भोजपत्र
  • जलपात्र
  • पारद शिवलिंग

माला – लाल मूंगे की माला

समय – रात्री का कोई भी

दिन – रविवार

आसन – लाल रंग का कोई भी आसन

दिशा – पश्चिम

अवधि – ग्यारह दिन

जाप संख्या – ग्यारह हजार

मंत्र :

ॐ नमो अवस्थनीमहाराज तेल का दीपक , घी की जोत , फूलो की माला , गले बिराजे , आपकी गति कोई ना जाने , हाथ पछानू मुख धोऊ , सुमिरु आपका नाम निरंतर , हमारी लाज रखो मोहिनो दोहिनी सोहिनी , तीनो बहिन आव आस मोहू पास मोहू , सब संसार में तिलक लगाकर निकलू , जो देखे वो बंधे अनजनी के पूत की दुहाई , गुरु गोरखनाथ की दुहाई , मेरी भक्ति , गुरु की शक्ति , फुरो मंत्र इश्वरो बाचा |

ध्यान रखे कि इस प्रयोग को भूलकर भी दुरुप्रयोग ना करे अथवा साधक को भारी हानि हो सकती है |

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