हत्था जोड़ी किसी विशेश किशम की पौधे की जड़ होती है | यह पौधा ज्यादातर मध्यप्रदेश के जंगलो में पाया जाता है | इसकी शाखाओं के सिरे पर मनुष्य का पंजा बना हुआ दिखाई देता है | हाथा जोड़ी यदि असली हो तो इसे माँ चामुंडा देवी का रूप माना जाता है | यह सभी प्रकार  बाधाओं से मुक्ति दिलाता है | धन संपत्ति प्राप्त करने में यह यह विशेश प्रभावकारी है | हत्था जोड़ी को नियमित पूजन करने से देवी देवताओं की विशेश कृपा प्राप्त होती है और इसकी शक्ति निरंतर बढती रहती है |  | रवि पुष्य योग में हत्था जोड़ी को लाकर तांत्रिक विधि विधान से पूजन करके स्थापित करने से मनमाफिक युवक या युवती का वशीकरण होता है | हत्था जोड़ी का पूजन करने से क़र्ज़ से छुटकारा मिलता है | व्यापार में लाभ होता है | हत्था जोड़ी में दो उंगलिया होती है , तथा दोनों की मुठ्ठी बंधी होती है | कभी कभी यह दो से तीन उआ फिर पांच ऊँगली तक की पायी जाती है | हत्था जोड़ी के प्रयोग से शत्रु का नाश  एवं  काला जादू के प्रभाव को समाप्त किया जाता सकता  है |

  • हत्था जोड़ी के प्रयोग से संतान का वशीकरण होता है |
  • हत्था जोड़ी के प्रयोग से प्रेमिका, स्त्री  या पत्नी का वशीकरण होता है |
  • हत्था जोड़ी के प्रयोग से पति , प्रेमी या किसी भी पुरुष का वशीकरण होता है |
  • हत्था जोड़ी के प्रयोग से जमीन का दबा हुआ धन या पूर्वजो का धन प्राप्त होता है |
  • हत्था जोड़ी के प्रयोग से वास्तु दोष दूर होता है |
  • हत्था जोड़ी के प्रयोग से गंभीर से गंभीर बिमारी भी ठीक हो जाती है |
  • हत्था जोड़ी के प्रयोग से क़र्ज़ समाप्त होता है |
  • हत्था जोड़ी के प्रयोग से धन सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है |
  • हत्था जोड़ी के प्रयोग से दुश्मन पर विजय प्राप्त होती है |
  • हत्था जोड़ी के प्रयोग से बुरे सपने आने बंद हो जाते है |
  • हत्था जोड़ी के प्रयोग से पढाई में आने वाली बाधा समाप्त होती है |
  • हत्था जोड़ी के प्रयोग से ग्रह दोष समाप्त हो जाता है |
  • हत्था जोड़ी के प्रयोग से कालसर्प दोष समाप्त हो जाता है |
  • हत्था जोड़ी के प्रयोग से मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है |
  • हत्था जोड़ी के प्रयोग से राजयोग प्राप्त होता है |

क़र्ज़ निवारण के लिए हत्था जोड़ी का प्रयोग

यदि आपके ऊपर अत्याधिक क़र्ज़ हो गया है| और क़र्ज़ को चुकाने का कोई भी रास्ता ना मूल रहा हो टी इस अदभुत चमत्कारी हत्था जोड़ी का प्रयोग अवश्य करे |

क़र्ज़ से मुक्ति के लिए हत्था जोड़ी की पूजा विधि :

सामग्री – ताबे का पात्र , हत्था जोड़ी , दूध का बना हुआ प्रसाद , तेल का दीपक , लोबान , धुप , सिन्दूर , दिव्य माला , लाल रंग का आसन , लाल रंग की धोती ,

दिन – बुधवार

दिशा – पूर्व

जाप संख्या – ग्यारह हजार

समय – दिन या रात्री

अवधि – ग्यारह दिन

मंत्र :

ॐ नमो इस्माइल जोगी कामाचा देवी ,  बीड़ा उठावे मेरा कार्य सिद्ध करे , कोऊ ना मांग अरु देवे , मीठा बोले कारज करे फुरो मंत्र इश्वरी वाचा , दुहाई गोरख नाथ की |

प्रयोग :

यह प्रयोग किसी भी बुधवार से प्रारम्भ किया जा सकता है | सर्वप्रथम तांबे के हत्था जोड़ी को एक पात्र में रख दे | और उस पर कम कम या सिन्दूर से तिलक लगावे | भीग लगावे | लोबान की धुप और दीपक जलावे | हाथा जोड़ी का चावल और  पुष्प से पूजन करे | मंत्र का जाप पूरा होने के बाद हत्था जोड़ी पर जो सिन्दूर लगाया है उसका अपने माथे पर तिलक लगा के क़र्ज़ मांगने वाले के सामने जाय | आप देखेंगे की वह प्रेम वा मित्रवत व्यवहार करेगा |

इस प्रयोग की विशेषता यह है की यदि आपने किसी से कर्जा लिया हो और वह बार बार आपको परेशान कर रहा हो | तो इस सिन्दूर को लगा ले वह कर्जा मांगने वाला आपसे क़र्ज़ वापिस करने को नहीं कहेगा | प्रयोग की समाप्ति के बाद हत्था जोड़ी को सौ ग्राम कमिया सिन्दूर के साथ किसी लकड़ी के बॉक्स में रख देना चाहिए | और जब भी आवश्यकता हो इसी सिंदूर का तिलक लगावे |

हत्था जोड़ी की पूजन विधि

किसी शुभ मुहूर्त दीपावली या रविपुस्य योग में रविवार के दिन हत्था जोड़ी को शुद्ध जल से स्नान कराकर लाल वस्त्र पर रखे | अब किसी कटोरी या प्याली में चमेली का तेल इतना रखे की हत्था जोड़ी उसमे पूरी तरह से डूब जाए | यह प्रयोग गोपनीय रूप से करे किसी की भी नज़र नहीं पड़नी चाहिए | अब इसी तरह से हत्था जोड़ी की तेल में तेरह से इक्कीस दिनों तक रहने दे | इक्कीस दिनों के बाद हत्था जोड़ी को सिन्दूर , लाल चन्दन , चावल वा धुप दीप से पूजन करे | पूजन करते समय निचे दिए हुए मंत्रो का इक्कीस माला का जाप करे |

मंत्र :

  • ॐ एम हरिम कलीम चमुन्दाये बिच्चे |
  • ॐ नमो चमुन्दाये अमुकं में वशं कुरु कुरु स्वाहा |
  • वशीकरण प्रयोग से अभिमंत्रित करने के लिए दुसरे मंत्र का ग्यारह हजार बार जाप करे | ग्यारह सौ मंत्रो की खीर की आहुति देकर मीठे फल और नौवेद्य अर्पित करे |

हत्था जोड़ी को अभिमंत्रित करने के लिए “ ॐ कलीम  कलीम स्वाहा “ गायत्री मंत्र का भी प्रयोग कर सकते है | हत्था जोड़ी जहा स्थापित की जाती है वहा पर लक्ष्मी जी की कृपा सदैव बनी रहती है |